भारतीय दंड संहिता की धाराएं

| भारतीय दण्ड संहिता की धाराएं |


  • *धारा 307 = हत्या की कोशिश*
  • *धारा 302 =हत्या का दंड*
  • *धारा 376 = बलात्कार*
  • *धारा 395 = डकैती*
  • *धारा 377= अप्राकृतिक कृत्य*
  • *धारा 396= डकैती के दौरान हत्या*
  • *धारा 120= षडयंत्र रचना*
  • *धारा 365= अपहरण*
  • *धारा 201= सबूत मिटाना*
  • *धारा 34= सामान आशय*



  • *धारा 412= छीनाझपटी*
  • *धारा 378= चोरी*
  • *धारा 141=विधिविरुद्ध जमाव*
  • *धारा 191= मिथ्यासाक्ष्य देना*
  • *धारा 300= हत्या करना*
  • *धारा 309= आत्महत्या की कोशिश*
  • *धारा 310= ठगी करना*
  • *धारा 312= गर्भपात करना*
  • *धारा 351= हमला करना*
  • *धारा 354= स्त्री लज्जाभंग*
  • *धारा 362= अपहरण*
  • *धारा 415= छल करना*
  • *धारा 445= गृहभेदंन*
  • *धारा 494= पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह*
  • *धारा 499= मानहानि*
  • *धारा 511= आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।*





📒 *भारतीय दंड संहिता* 📒 *या* 📒 *भारतीय दंड विधान* 📒 *या* 📒 *(I. P. C)* 📒 ♦ *प्रस्तावना* ♦


  • *धारा - 1 =संहिता का नाम और विस्तार।*
  • ♦ *साधारण स्पष्टीकरण* ♦
  • *धारा - 21= लोक सेवक।*
  • *धारा - 34 सामान आशय।*
  • *धारा - 52 = सद् भावपूर्ण।*
  • *धारा - 52. क = संश्रय।*



♦ *साधारण अपवाद* ♦


  • *धारा - 76 तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा आबद्ध )।*
  • *धारा - 79 = तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा न्यायनुमतः)।*
  • *धारा - 81 =यदि बड़ी हानि रोकने के लिए छोटी हानि करना अपराध नही।*
  • *धारा - 82 = 7 वर्ष से कम शिशु का अपराध नही।*
  • *धारा - 83 = 7-12 वर्ष के बीच अपराध नही (यदि अपरिपक्व हो)।*
  • *धारा - 84 = पागल द्वारा अपराध नही है।*
  • *धारा - 85 =मद्यपान में अपराध नही (इच्छा के विरुद्ध मद्यपान )।*
  • *धारा - 86 = मद्यपान में अपराध (इच्छा से, बिना ज्ञान के )।*

♦ *प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार* ♦

*धारा - 96 = आत्मरक्षा में अपराध नही है।*

  • *धारा - 97 = अपना व दूसरे के शरीर, चोरी, लूट व रिष्टी में आत्मरक्षा का अधिकार।*
  • *धारा - 98 = पागल व बच्चों के हमले पर आत्मरक्षा का अधिकार।*
  • *धारा - 99 = आत्मरक्षा के अधिकार के बन्धन।*
  • *धारा - 100 = आत्मरक्षा में मृत्यु कारित करना (1. मृत्यु होने की आशंका हो। 2. गम्भीर चोट की आशंका हो 3. बलात्कार के हमले पर 4. प्रकृति के विरुद्ध काम - तृष्णा करने पर 5.व्यपहरन में 6. कहीं पर बंद हो और वहा से छूटने के लिए 7. अम्लीय हमले पर)।*
  • *धारा - 101 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट मारने का अधिकार।*
  • *धारा - 102 = आत्मरक्षा का अधिकार का प्रारंभ और बना रहना।*
  • *धारा - 103 = सम्पति की प्रतिरक्षा में मृत्युकारित करने का अधिकार (1.रात्री ग्रह भेदन 2. मानव के रहने वाले जगह पर रिष्टी (आग लगाना) 3. ग्रह-अतिचार में)।*
  • *धारा - 104 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट पहुंचाने का अधिकार (सम्पत्ति के लिए )।*
  • *धारा - 106 = आत्मरक्षा में निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुचाने का अधिकार।*
  • ♦ *आपराधिक षडयंत्र* ♦
  • *धारा - 120.क = आपराधिक षड़यंत्र की परिभाषा (दो या दो से अधिक लोग रचे)।*
  • *धारा - 120.ख = आपराधिक षड्यंत्र का दण्ड।*
  • ♦ *सरकार के विरुद्ध अपराध* ♦
  • *धारा - 121 = सरकार के विरुद्ध युध्द, प्रयत्न, दुष्प्रेरण करना।*
  • *धारा - 121.क = धारा - 121 का षड़यंत्र करना।*
  • *धारा - 122 = सरकार के विरुद्ध करने के आशय से युद्ध के सामान इकठ्ठा करना।*
  • *धारा - 123 = युध्द की होने वाली घटना को सफल बनाने के आशय से छिपाना।*
  • *धारा - 124 = किसी विधिपूर्वक शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश या प्रयोग करने या अवरोध करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला।*
  • *धारा - 124.क = राजद्रोह।*


♦ *लोक अशांति के अपराध* ♦


  • *धारा - 141 = विधि विरुद्ध जमाव (पाँच या ज्यादा )।*
  • *धारा - 142 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना।*
  • *धारा - 143 = दण्ड।*
  • *धारा - 144 = घातक हत्यार लेकर जमाव में सम्मिलित होना।*
  • *धारा - 149 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना (सामान उद्देश्य हो)।*
  • *धारा - 151 = पाँच या से अधिक लोगों को बिखर जाने का आदेश देने के बाद भी बना रहना।*
  • *धारा - 153 = किसी धर्म, वर्ग, भाषा, स्थान, या समूह के आधार पर सौहार्द बिगाड़ने का कार्य करना।*
  • *धारा - 159 = दंगा (दो या अधिक लोग लड़कर लोक शान्ति में विध्न डाले)।*
  • *धारा - 160 = दगें का दण्ड।*

♦ *लोक सेवकों के अपराध* ♦


  • *धारा - 166 = लोक सेवक सरकारी काम न करें किसी को नुकसान पहुंचाने के आशय से।*
  • *धारा - 166.क = कोई लोक जानते हुए सरकारी कार्य की अपेक्षा करना।*
  • *धारा - 166.ख = किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में पीड़ित का उपचार न करना (अपराधी केवल संस्थान का मुख्य होगा)।*
  • *धारा - 177 = जो कोई किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक को जो आबद्ध होते

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